आज तो चढ्ढी भी सिलती इंगलिसों की मिल मे है

कल ही अनुराग कश्यप की गुलाल देखी। फिल्म को ले कर मिश्रित राय है। एक समीक्षा लिख रहा हूँ, शाम तक प्रकाशित करूँगा। समीक्षा क्या मेरे विचार है। मै कोई प्रमाणित या पेशेवर समीक्षक तो हूँ‌ नहीं कि 'रेटिंग' देता फिरूं।

यह रहा स्वतंत्रता दिवस का वीडियो

जैसे कि मैने पिछली पोस्ट मे वायदा किया था कि शीघ्र ही‌ वीडियो भी‌ प्रकाशित करूँगा तो वायदे पर कायम रहते हुये बंदा वीडियो ले कर हाजिर है। विलम्ब के लिये क्षमा।

स्वतंत्रता दिवस की झलकियाँ

४ जुलाई, यानी अमरीकी स्वतंत्रता दिवस। इस शुभअवसर पर नापर दंपत्ति भी हमारे साथ था। यह जगमग जर्मनी मे अमरीकी सैन्य ठिकाने, गार्मिश स्थित एडेल्वाइस की हैं। भव्य आयोजन के कुछ चित्र आपके लिये।

एक महान व्यक्ति की आवभगत: क्लास नापर आये मेहमान बन कर

क्लाज नापर से तो आप परिचित ही होंगें। गनू/ लिन्क्स के उपयोग कर्ता जो जरूर ही परिचित होंगे। अगर नही हैं तो थोडा बता देता हूँ या यह विकीपीडिया पेज देख लें।

क्या पिता जी को 'फादर्स डे' की बधाई दी आपने?

आज अमरीकी फादर्स डे है। हिन्दुस्तान मे कभी पिता दिवस या माता दिवस नही सुना तो पता ही नही था। इससे पहले भी मै जबतक सांस्कृतिक कारण न हो बिना जाने समझे विदेशों के त्योहार नही मनाता था। उसका कारण कोई दुर्भावना नही -- जैसी कि सिवसेना वाले बैलेन्टाईन डे पर करते हैं -- बल्कि निरा अज्ञान था। जब पता ही नही कि ओणम क्या होता है तो मनाये क्या। कई बार मित्रों, जिनका न इसाईयत से कुछ लेना न देना था, को क्रिसमस या थैंक्सगिविंग डे मनाते देखता तो पूछ बैठता भाई यह है क्या और आपको इससे क्या सरोकार? जवाब मिलता 'इट्स पार्ट आफ अवर कल्चर'। उन्हे कभी ओणम, या बकरीद, या नागपंचमी 'सेलीब्रेट' करते नही देखा। शायद ईट वाज नाट पार्ट आफ देयर कल्चर। मामला ले दे कर पश्चिम के अंधानुकरण का बनाता दिखता है। उसमे भी कोई बुराई नही है। एक दूसरे से सीख कर ही तो इंसान आगे बढता है।

क्या भाषा भी‌ कठिन होती है?

लवली के ब्लोग पर कोई टिप्पणी आयी कि भाषा सरल होनी चाहिये। लवली ने उस पर आपत्ति दर्ज की है। सारी चर्चा किताबी-चेहरा (फेस-बुक) पर हो रही है इसलिय न तो मुझे संदर्भ पता है और न ही स्रोत। हा लवली को नियमित पढता रहता हूँ और उनके विषय -- मनोविज्ञान/सर्प -- के बारे मे सतही जानकारी रखने के कारण औपचारिक टिप्प्णी से बचता हूँ। लेकिन लेखक होने के नाते भाषा के विषय पर ज़रूर कुछ न कुछ कह सकता हूँ। इससे पहले कि ओखली मे सिर दूँ इतना बताना चाहता हूँ कि मै हिंदी और अंग्रेजी दोनो मे ही काम करता हूँ। लेकिन दोनो की मर्यादा के भीतर।

पोलैण्ड यात्रा (भाग १)

पत्त्नी जेन भारतीय को एक कान्फ्रेन्स के सिलसिले मे वार्सा, पोलैण्ड जाना था। शादी के प्रारंभिक दिनों मे हमे ४ माह अलग अलग रहना पडा -- वे जर्मनी मे और मै भारत में। १४ जुलाई २००९ मे मै जर्मनी आया और तब से हम कभी‌ भी १० घंटे से अधिक अलग नही रहे -- रह ही नही सकते।

गार्मिश से ग्राईनो साईकिल यात्रा तथा रात्रि भोज!

शुक्रवार की शाम, अगले दिन पत्नी के द्फतर मे छुट्टी। घर आते ही कार्यक्रम बना की "बाईक राईड" (दुपहिया यात्रा) पर चला जाये।

एक बागीचा न्यारा!

बहुत दिनों से नियमित हिंदी ब्लाग लिखने की सोच रहा हूँ पर कल्किआन, कटोंडा, मुक्तवेयर और अब फासिप से समय ही‌ नही मिल पाता। शेष समय बिल्लियों के लाड दुलार और पारिवारिक कामों मे निकल जाता है। फिर सोचा क्यों ने रोज की जिन्दगी के कुछ क्षण यहाँ बाटें जायें।

A Bike Ride To Grainau, Germany