Sun, 06/20/2010 - 20:02
आज अमरीकी फादर्स डे है। हिन्दुस्तान मे कभी पिता दिवस या माता दिवस नही सुना तो पता ही नही था। इससे पहले भी मै जबतक सांस्कृतिक कारण न हो बिना जाने समझे विदेशों के त्योहार नही मनाता था। उसका कारण कोई दुर्भावना नही -- जैसी कि सिवसेना वाले बैलेन्टाईन डे पर करते हैं -- बल्कि निरा अज्ञान था। जब पता ही नही कि ओणम क्या होता है तो मनाये क्या। कई बार मित्रों, जिनका न इसाईयत से कुछ लेना न देना था, को क्रिसमस या थैंक्सगिविंग डे मनाते देखता तो पूछ बैठता भाई यह है क्या और आपको इससे क्या सरोकार? जवाब मिलता 'इट्स पार्ट आफ अवर कल्चर'। उन्हे कभी ओणम, या बकरीद, या नागपंचमी 'सेलीब्रेट' करते नही देखा। शायद ईट वाज नाट पार्ट आफ देयर कल्चर। मामला ले दे कर पश्चिम के अंधानुकरण का बनाता दिखता है। उसमे भी कोई बुराई नही है। एक दूसरे से सीख कर ही तो इंसान आगे बढता है।